गार्डनगिरी
बड़े शहरों में अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों को शुभम सिंह ‘वर्टीकल गार्डनिंग’ करना सिखा रहे हैं, जिससे उन्हें ताजा सब्ज़ियाँ भी मिले और घर में पड़ी बेकार प्लास्टिक की बोतलों का उचित उपयोग भी हो।
उत्तर-प्रदेश के प्रतापगढ़ में रहने वाले शुभम सिंह को बचपन से ही पेड़-पौधों से लगाव रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गुजरात में नौकरी भी की लेकिन बागवानी के प्रति उनका प्रेम बिल्कुल कम नहीं हुआ।
उनके गार्डन में गुलाब, गेंदे आदि फूलों के साथ-साथ बैंगन, शिमला मिर्च, धनिया, पालक, ब्रोकली, आलू, मूली, टमाटर, हरी मिर्च, गोभी, नींबू जैसी सब्ज़ियां और फल भी आपको मिल जाएंगे। शुभम ने बागवानी शुरू की,
अगर कोई अपना गार्डन/बगीचा लगाना चाहता है तो उसे सबसे पहले क्या करना चाहिए?
शुभम: सबसे पहले आपको ऐसी जगह का चुनाव करना चाहिए जहां थोड़ी खुली जगह हो और अच्छी धूप आती हो। वैसे तो आजकल आप दीवार पर, बालकनी में भी वर्टिकल गार्डनिंग कर सकते हैं, लेकिन धूप बहुत ज़रूरी है। फिर ऐसी कोई जगह चुनें जो आपके घर के पास हो और जहां पर पानी की सुविधा हो।
2. अगर कोई पहली बार गार्डनिंग कर रहा है तो उन्हें किस तरह के पेड़-पौधे लगाने चाहिए?
शुभम: शुरूआत में आपको ऐसे पेड़-पौधे बोने चाहिए जिन्हें बहुत ज्यादा देखभाल की ज़रूरत न हो। फिर धीरे-धीरे जब आपकी पेड़-पौधों से अच्छी दोस्ती होने लगे तो आप दूसरे पेड़ लगाएं। शुरूआत के लिए, गेंदा, तुलसी, पुदीना, एलोवेरा, मनी प्लांट, आलू,पालक, चांदनी, डबल आदि।
शुभम: यह सबसे ज्यादा ज़रूरी स्टेप है और हमें पूरा ध्यान रखना चाहिये कि हमारी मिट्टी एकदम पोषण से भरपूर हो ताकि पेड़-पौधे अच्छे से पनपें। आप मिट्टी में रेत और गोबर की खाद या फिर वर्मी कंपोस्ट मिलाएं। याद रहे कि इसमें मिट्टी 30%, रेत 30% और कंपोस्ट 40% होना चाहिये और आपका पॉटिंग मिक्स तैयार है।
4. अगर हम छत पर पेड़-पौधे लगा रहे हैं तो क्या इससे हमारी छत में लीकेज हो सकता है या फिर किसी भी तरह से यह खराब हो सकती है?
शुभम:आप पौधों के लिए गमले, ग्रो बैग या फिर प्लांटर्स इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। आपकी छत खराब नहीं होगी।
5. गार्डनिंग करने के कुछ क्रियात्मक और रचनात्मक तरीके बताएं?
शुभम: अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों को लगता है कि छोटी जगह में कैसे गार्डनिंग होगी और वह भी सब्ज़ियां उगाना? पर मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि आप आसानी से अपनी छोटी सी बालकनी या छत पर गार्डनिंग कर सकते हैं, बस आपको थोड़ा कलात्मक होना होगा।
आप बालकनी की दीवार पर वर्टीकल गार्डनिंग कर सकते हैं। प्लास्टिक की पुरानी-बेकार बोतलों को दीवारों पर लटकाकर उनमें पेड़-पौधे लगा सकते हैं। बहुत से लोग आजकल ऐसा कर रहे हैं। इन पौधों को बस थोड़ा-सा वक़्त चाहिए और थोड़ी सी मेहनत।
6. पौधों को पानी देने के कुछ ऐसे तरीके, जिससे कि पानी बर्बाद न हो?
शुभम: मुझे लगता है कि पानी देने का कोई सही या गलत तरीका नहीं होता है। आपको बस यह ध्यान में रखना है कि आपके गमलों में मिट्टी सूखी तो नहीं है। आपको मिट्टी को महसूस करना आना चाहिए ताकि जब भी आपको लगे कि मिट्टी में नमी नहीं है आप तुरंत पानी दें। इस बात का नियमित तौर पर ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी बनी रहे। यह पेड़-पौधों के लिए काफी ज़रूरी है।
7. गार्डनिंग शुरू करने का सबसे बेहतर समय कौन-सा है?
शुभम: गार्डनिंग शुरू करने के लिए सबसे अच्छा मौसम मेरे हिसाब से सर्दियां और बसंत ऋतु है।
8. कोई घरेलू नुस्खा बताइए जिससे पेड़-पौधों को पोषण दिया जा सकता है?
शुभम: आप घर के गीले कचरे और केले के छिलकों से घर पर ही ‘लिक्विड फ़र्टिलाइज़र’ बना सकते हैं।
सब्ज़ियों के छिलके हर रोज़ आपकी किचन से निकलते ही हैं, आप इन्हें इकट्ठा कर लें और याद रखें कि आप इनमें एक गाँठ अदरक की भी डालें। अदरक एंटी-फंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। यह पेड़ों में फंफूद या फिर कोई अन्य बीमारी नहीं लगने देता। अब इसे मिक्सी में डालकर पीस लें।





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